शनिवार, 25 अप्रैल 2026
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7 सांसदों ने AAP छोड़ी, क्या पंजाब में टूट होगी:2022 में चड्ढा-पाठक ने चुनाव जितवाया, दिल्ली हार के बाद बगावत संभाली; अब 30-35 MLA पर नजर

14 घंटे पहले  ·  24 अप्रैल 2026, 11:55 pm
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7 सांसदों ने AAP छोड़ी, क्या पंजाब में टूट होगी:2022 में चड्ढा-पाठक ने चुनाव जितवाया, दिल्ली हार के बाद बगावत संभाली; अब 30-35 MLA पर नजर

पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले AAP के 7 सांसदों ने पार्टी छोड़ दी। इनमें 6 सांसद पंजाब के हैं। AAP के इलेक्शन स्ट्रेटजी के चाणक्य डॉ. संदीप पाठक और सुपर CM कहे जाने वाले राघव चड्‌ढा तो कल ही BJP में भी शामिल हो गए। इनका BJP में जाना इसलिए ज्यादा चर्चा में है क्योंकि 2022 में AAP को पंजाब की 117 में से 92 सीटें जिताने वाली टीम में ये सबसे अहम जोड़ी थी। संदीप पाठक ने बैकएंड से पूरी पॉलिटिकल स्ट्रेटजी बनाई तो राघव चड्‌ढा ने कैंपेन को ऑन ग्राउंड लागू किया। अब यही जोड़ी 2027 में दिल्ली हार के बाद बचे AAP के इकलौते किले पंजाब में सेंध लगा सकती है। राघव चड्ढा के करीबियों का दावा है कि पार्टी के 30 से 35 विधायकों से उनकी काफी नजदीकियां हैं। वहीं दिल्ली विधानसभा चुनाव में हार के बाद पंजाब में भी बगावत की बात चलने लगी, तो पाठक ने ही तुरंत दिल्ली से पंजाब सभी विधायक तलब कर बगावत को कंट्रोल किया था। ऐसे में इन दोनों के BJP में जाने से AAP में टूट का खतरा बढ़ गया है। पंजाब के पॉलिटिकल एक्सपर्ट भी मानते हैं कि एक साथ 7 सांसदों का पार्टी छोड़ने का असर विधायकों पर भी पड़ सकता है। ये दोनों कई AAP विधायकों व चेयरमैनों के गॉड फादर हैं। चुनाव से पहले AAP में बड़े बदलाव दिख सकते हैं, पढ़िए पूरी रिपोर्ट… ऐसे में अब राघव चड्ढा और संदीप पाठक के भाजपा जॉइन करने से आम आदमी पार्टी में टूट का खतरा बढ़ गया है। चड्ढा और पाठक अब अपने नजदीकी विधायकों को भाजपा के खेमे में ला सकते हैं। 2022 विधानसभा चुनाव में पंजाब में टिकट बंटवारे से लेकर पार्टी के कैंपेन का जिम्मा डॉ संदीप पाठक के पास था और फाइनेंस का पूरा जिम्मा राघव चड्ढा के हाथ में था। ऐसे में पंजाब में जितने भी विधायक हैं, सबकी टिकटें इनके हाथों से होकर निकलीं। पंजाब चुनाव के लिए क्यों अहम ये जोड़ी? संदीप पाठक का 2022 चुनाव में क्या रोल रहा, AAP को क्या नुकसान संदीप पाठक को पंजाब में AAP का चुनावी ‘चाणक्य’ माना जाता रहा है। पंजाब प्रभारी के तौर पर उन्होंने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत किया। 2022 चुनाव में टिकट बंटवारे की प्रक्रिया में उनकी अहम भूमिका रही और कैंडिडेट इंटरव्यू से लेकर फाइनल लिस्ट तैयार करने तक वे सक्रिय रहे। उन्होंने कार्यकर्ताओं की टीमें बनाईं और संगठन को गांव स्तर तक फैलाया। पार्टी के एक-एक नेता से खुद संपर्क किया। दिल्ली विधानसभा चुनाव में हार के बाद पंजाब में भी बगावत की बात चलने लगी तो पाठक ने पंजाब आकर विधायकों को साफ कह दिया था कि जिसको जाना है, चले जाएं। मेरे पास एक-एक विधायक, हर गतिविधि की पूरी रिपोर्ट है। उसके बाद पार्टी में सभी चुप बैठ गए। इस पर पॉलिटिकल एक्सपर्ट व पूर्व VC डॉ. कृपाल सिंह औलख कहते हैं- संदीप पाठक ने पंजाब में चुनाव को लेकर इनडेप्थ वर्किंग की है। जितना इसका फायदा भाजपा को मिलेगा, AAP को उतना ही नुकसान हो सकता है। अगर उन्हें विधायकों के बारे में सब पता है तो इसके जरिए भी वह AAP विधायकों को BJP में आने के लिए प्रभावित कर सकते हैं। राघव चड्‌ढा ने 2022 चुनाव में क्या किया, BJP को क्या फायदा पंजाब के 2022 के चुनाव में राघव चड्‌ढा फ्रंटलाइन के प्रमुख चेहरा रहे। AAP ने भगवंत मान को भले ही CM चेहरा बनाया लेकिन राघव चड्‌ढा ग्राउंड में कैंपेन से लेकर पार्टी के प्रचार में पैरलल पोजिशन में नजर आए। तब राघव चड्‌ढा अरविंद केजरीवाल के सबसे करीबी नेताओं में थे और प्रचार की रणनीति बनाते थे। पार्टी के सह प्रभारी रहते 2022 में चड्‌ढा ने टिकट बंटवारे और अलग-अलग पार्टियों और नॉन पॉलिटिकल फील्ड से आए नेताओं को एकजुट किया। जब AAP ने 117 में से 92 सीटें जीतीं तो इसका क्रेडिट भी राघव चड्‌ढा को मिला। यही वजह है कि सरकार बनने पर मुख्यमंत्री तो भगवंत मान बने लेकिन राघव को सुपर CM कहा जाने लगा। राहुल गांधी तक ने कहा कि पंजाब को RC चला रहा है। तब ये भी चर्चा रही पंजाब सरकार की सारी फाइलें पहले राघव चड्‌ढा के पास जाती थी, फिर AAP सरकार उन्हें पास करती थी। राघव चड्‌ढा का दबदबा इस बात से भी लगा सकते हैं कि सरकार बनते ही CM भगवंत मान ने उन्हें अपना एडवाइजर लगा दिया था। जिसे सरकार के कामकाज में उनका डायरेक्ट दखल भी माना गया। पार्टी से लेकर सरकार तक में राघव चड्‌ढा की पकड़ के साथ पूरी दखलअंदाजी रही। चड्‌ढा के करीबियों का दावा है कि करीब 30 से 35 MLA उनके साथ आ सकते हैं। पॉलिटिकल एक्सपर्ट इंजीनियर पवनदीप शर्मा कहते हैं कि जिस हिसाब से राघव 2022 में AAP में दबदबा रखते थे, उससे ये साफ है कि बहुत सारे नेताओं को उन्होंने ही टिकट दिलाई होगी। ऐसे में वह MLA जरूर राघव चड्‌ढा के प्रभाव में आकर पार्टी छोड़कर BJP में आ सकते हैं। डॉ. औलख बोले- बंगाल चुनाव पंजाब की राजनीति तय करेगा पॉलिटिकल एक्सपर्ट व पूर्व VC डॉ किरपाल सिंह औलख ने कहा- जिस तरह से सात सांसद एक साथ पार्टी छोड़कर बीजेपी में गए हैं, वैसे पंजाब में भी AAP के लिए खतरा हो सकता है। उन्होंने कहा कि इतना जरूर है कि जल्द कुछ ऐसा होगा, यह संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव नजदीक आने पर पार्टी के नेता पाला बदल सकते हैं। तब तक संदीप पाठक व राघव चड्‌ढा उनसे संपर्क करके पूरी रणनीति बनाएंगे और सही मौके पर पार्टी में शामिल करवाएंगे। मुझे लगता है कि बंगाल का चुनाव पंजाब की राजनीति को तय करेगा। उन्होंने बताया कि अगर भाजपा बंगाल में सरकार बनाने में कामयाब हो गई तो फिर इस बार भाजपा पंजाब में पूरी आक्रमकता के साथ आएगी। इंजी. शर्मा बोले- पार्टी को बड़ा नुकसान पहुंचा सकते हैं पॉलिटिकल एक्सपर्ट इंजीनियर पवनदीप शर्मा ने कहा- जब पंजाब में AAP की सरकार बनी तो राघव चड्‌ढा व संदीप पाठक सुपर CM की तरह काम करते रहे। इस दौरान पंजाब में जितने चेयरमैन लगे या एमएलए बने हैं, वो इनके पास से होकर निकले हैं। कई नेता तो ऐसे हैं, जिनकी पहली राजनीतिक पारी और उसमें भी जीत के साथ कुर्सी मिलने का श्रेय भी चड्‌ढा और पाठक को जाता है। ऐसे में उनमें इन दोनों नेताओं की अच्छी पैठ है। अब भले ही ये दोनों AAP से अलग हो गए लेकिन वह भी इनके संपर्क में होंगे। ये पार्टी को बड़ा नुकसान पहुंचा सकते हैं। AAP के विधायक पार्टी छोड़ सकते हैं, इस बात की चर्चा क्यों है? 7 सांसदों के AAP छोड़ने पर CM और विरोधियों ने क्या कहा… CM मान ने कहा- 6-7 गए हैं, ये पंजाब के गद्दार सीएम भगवंत मान ने शुक्रवार को कहा- ये 6-7 गए हैं, ये पंजाब के गद्दार हैं। इन्हें बिना वोट मांगे राज्यसभा मिल गई। वहां जाकर तिड़कम करने लग गए। इनको गली मोहल्लों में हाथ नहीं जोड़ने पड़े। भाजपा असल में जनता की पार्टी नहीं है। बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी तोड़ने की कोशिश की। महाराष्ट्र में शरद पंवार की पार्टी तोड़ी। ये पार्टी तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। जो लोग पंजाब के नहीं हो सके वो लोगों के कैसे हो जाएंगे। वड़िंग बोले- AAP के 50 विधायक भी बीजेपी में जा सकते हैं पंजाब कांग्रेस प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने कहा कि आम आदमी पार्टी में टूट होना तय था, क्योंकि इस पार्टी की कोई विचारधारा नहीं है। अभी सिर्फ सांसद ही गए हैं, लेकिन पार्टी को अपने विधायकों पर भी ध्यान देना चाहिए, क्योंकि AAP के करीब 50 विधायक भी बीजेपी में शामिल हो सकते हैं। सांसदों पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि पंजाब की राजनीति में इन सांसदों की अब कोई प्रासंगिकता नहीं रह गई है। भाजपा नेता- अपने कृत्यों के कारण टूट रही AAP भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री मनोरंजन कालिया ने कहा कि आम आदमी पार्टी अपने कृत्यों के कारण टूट रही है। अभी समय और गुजरने दो और लोग भी आएंगे। जो लोग भाजपा की नीतियों से प्रभावित हो रहे हैं। उनको भाजपा में शामिल किया जाएगा। ************ ये खबर भी पढ़ें: AAP के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा भाजपा में: कहा- 10 में से 7 सांसद साथ, अशोक मित्तल ने ED छापे के 10वें दिन भाजपा जॉइन की आम आदमी पार्टी के 10 राज्यसभा सांसदों में से 7 सांसदों ने पार्टी छोड़ दी है। इसका ऐलान पंजाब से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने शुक्रवार शाम को 4 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया। इसके बाद वह भाजपा कार्यालय पहुंचे, जहां राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने राघव के साथ संदीप पाठक और अशोक मित्तल को पार्टी की सदस्यता दिलाई। (पढ़ें पूरी खबर)

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